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मेरी ज़िंदगी का एक अनछुआ हिस्सा

खुद में इस क़दर तुमको महफूज़ रखता हूँ
कि हरजगह तुम्हें ही अब महसूस करता हूँ।

तुम मेरी यादों में हो, मैं तेरी बातों में हूँ
तुम मेरी साँसों में हो, मैं तेरी आँखों में हूँ।

इतना प्यार करता हूँ, के बेशुमार करता हूँ
तेरे आने का आज भी, मैं इंतज़ार करता हूँ।

तेरी डायरी का एक अधूरा हिस्सा, मेरे पास रखा हैं
मेरी ज़िंदगी का एक अनछुआ हिस्सा, तुमने छुआ हैं।

तुझे याद करना मुझे इस कदर अच्छा लगता है
कि तेरा ख़याल ही जैसे कोई मासूम बच्चा लगता है।

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आखिरी साँस तक लड़ते रहना

धीर धरम मित्र और नारी
आपत्तिकाल परखिए चारी।

इतना क्यों बेचैन हो भाई
अभी बाक़ी है चाल तुम्हारी।

खेल जो खेला है उन सबने
उस खेल के तुम हो मदारी।

कभी भी हमला हो सकता है
रखो तुम अपनी पूरी तैयारी।

चिट भी तेरी, पट भी तेरी
यही है असल दुनियादारी।

कमज़ोर करे जो तुझ को यहाँ
मिटा दे वो जड़ से बीमारी।

आखिरी साँस तक लड़ते रहना
निभाना हमेशा खुद से यारी।।

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मेरा नसीब भी जाने कैसा बदनसीब है

हाय मेरा नसीब भी जाने कैसा बदनसीब है
कल जो मेरा हबीब था आज वही मेरा रक़ीब है

याद करता हूं रोज उसे, किसी न किसी बहाने से
वो दूर होकर भी सदा मेरे दिल के बेहद क़रीब है

ऐसे इन्सान का तो कुछ भी किया नहीं जा सकता
वो जो मालदार होकर भी कहता खुद को ग़रीब है

संभलकर रहिए जरा, और संभलकर चलिए जरा
दुनिया के हालात तो आजकल बड़े ही अजीब है

अच्छे के साथ बुरा, बुरे के साथ अच्छा सुलूक
जरा हमें भी बताइए आप यह कौनसी तहज़ीब है

ये सच है कि, ज़िन्दगी फ़ानी और मौत लाफ़ानी है
फिर भी मौत से ज्यादा तुझे यह ज़िन्दगी हबीब है

नसीब को भी पता नहीं, नसीब में क्या है उसके
इसीलिए तो हम सब उसे कहते अपना नसीब है।

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बचपन से जवानी तक का सफर

बचपन के उन गलियारों की याद अब भी बाक़ी है
भूली बिसरी कुछ यादों का साथ अब भी बाक़ी है

स्कूल की उस बेंच पर हमेशा पास पास हम बैठते थे
एक दूसरे का नाम लेकर फिर एक दूसरे को छेड़ते थे

किताब में अपना दिल बनाकर नाम उसका ही लिखते थे
ऐसी बात नहीं है बचपन में हम भी बहुत स्मार्ट दिखते थे

बिछुड़ गए कुछ दोस्त बीच सफ़र में ही कहीं दूर निकल गए
कटवाकर वो अपनी टीसी फिर किसी दूसरे शहर को चले गए

साल बीते दिन गुज़रे आखिर काॅलेज लाइफ की शुरूआत हुई
फिर एक दिन अचानक मेरी उससे फेसबुक पर मुलाकात हुई

याद आने लगी फिर एक एक करके वो सब पुरानी बातें
लड़ना झगड़ना रूठना मनाना और मीठी मीठी सब यादें

सब कुछ सही चल रहा था कि तभी एक रोज वो तक़रार हुई
दोस्ती के दरमियान खड़ी गलतफहमियों की बड़ी दीवार हुई

हालांकि वक़्त बहुत लगा था हमें एक दूजे को माफ़ करने में
मगर यह सही था ज़रूरी था जज़्बात के फिर से पनपने में

तजुर्बा यह हासिल हुआ कि दोस्ती से बड़ी कोई चीज नहीं
खुशनसीब हैं वो लोग जिनके दोस्त है क्योंकि दोस्ती से बढ़कर कुछ भी नहीं।

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Short Zindagi Poem on Badlta Waqt

वक्त के साथ हरवक्त, वक्त भी बदल रहा है
ज़िन्दगी का सूरज, देखो कैसे ढ़ल रहा है

आने वाला कल हरपल, पास अपने बुलाता है
सपनों के सुकून भरे, साये में तुझको सुलाता है

जो गुज़र गया वो गुज़र गया, फिर किसलिए तू ठहर गया
मन के अपने इस गाँव को छोड़कर, अजनबी उस शहर गया

बुलबुला है जीवन यह, फिर इतनी दौड़ भाग क्यों
मतलबी इस दुनिया के लिए, आत्मा पर दाग क्यों

नज़र के साथ हरघड़ी, नज़ारा भी बदल रहा है
ज़िन्दगी का ये टुकड़ा, देखो कैसे पिघल रहा है।

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अश्क़ों की नमी और यादों की हवा

अश्क़ों की नमी और यादों की हवा ने
बरसों तक मुझ पर यूँही जंग लगाया

दिल का मेरे ओ सनम, है ये कैसा आलम
चाहकर भी मैं तुझसे जुदा न हो पाया

जिक्र जब भी होता है, तेरा ही तो होता है
बातों में मेरी तू कुछ इस तरह समाया

सफ़र तो कई हुए, ना हुआ हमसफ़र कोई
टूटे मन को मेरे इक तू ही तो छू पाया ।

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जुदा शायरी

अश्क़ों की नमी और यादों की हवा ने
बरसों तक मुझ पर यूँही जंग लगाया

दिल का मेरे ऐ सनम, है ये कैसा आलम
चाहकर भी ये तुझसे जुदा न हो पाया